डॉ आंबेडकर की अंतिम यात्रा दादर से 1.00 बजे यात्रा निकली और शाम के 6:00 बजे दादर चौपाटी की हिंदू स्मशान भूमि में पहुंची | चैत्यभूमी डॉ बाबासाहेब आंबेडकर के समाधि स्थल 1948 से अंबेडकर मधुमेह से पीड़ित थे | जून से अक्टूबर 1950 4th को बहुत बीमार है इस दौरान वह कमजोर होती है | दृष्टि से ग्रस्त थे राजनीतिक मुद्दों से परेशान आंबेडकर का स्वस्थ बद से बदतर होता चला गया और 1955 के दौरान किए गए लगातार काम ने उन्हें तोड़ कर रख दिया |

अपनी अंतिम पांडुलिपि भगवान बुद्ध और उनका धम्म को पूरा करने के 3 हफ्ते बाद 6 दिसंबर 1956 को अंबेडकर का महापरिनिर्वाण नींद में दिल्ली में उनके घर में हो गया तब उनकी आयु 64 वर्ष की थी दिल्ली से विशेष विमान द्वारा उनका पार्थिव मुंबई में उनके घर राजगुरु में लाया गया | 7 दिसंबर को मुंबई में दादर चौपाटी समुद्र तक बुद्ध शैली में अंतिम संस्कार किया गया जिससे उनके लाखों समर्थक कार्यकर्ताओं और प्रशंसकों ने भाग लिया उनके अंतिम संस्कार के समय उनके पार्थिव को साक्षी रखकर उनके दस लाख से अधिक आने वाली ने भदंत आनंद कौसल्यायन द्वारा बुद्ध धर्म की दीक्षा की थी क्योंकि अंबेडकर 16 दिसंबर 1956 को मुंबई में एक बौद्ध धर्मांतर कार्यक्रम आयोजित किया गया |

मृत्यु पर्यंत आंबेडकर के परिवार में उनकी दूसरी पत्नी सविता अंबेडकर रह गई थी जो दलित बुद्ध आंदोलन में अंबेडकर के बाद बुद्ध बनने वाली पहली व्यक्ति थी | विवाह से पहले उनकी पत्नी का नाम डॉक्टर शारदा कबीर था डॉक्टर सविता अंबेडकर की एक बुद्ध के रूप में 29 मई सन 2003, 94 वर्ष की आयु में मृत्यु हो गई और पुत्र यशवंत आंबेडकर अंबेडकर के पुत्र प्रकाश आंबेडकर भारीपा बहुजन महासंघ का नेतृत्व करते हैं |

15 और भारी संसद के दोनों सदन दोनों सदनों में एक सदस्य रह चुके हैं | एक समानता अंबेडकर के दिल्ली स्थित उनके घर 26 अलीपुर रोड में साबित किया गया अंबेडकर जयंती पर सार्वजनिक अवकाश रखा जाता है | 1990 में उन्हें उत्तर भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत से सम्मानित किया गया |

हर साल 2000000 से अधिक उनकी जयंती महापरिनिर्वाण यानी पुण्यतिथि पुण्यतिथि 6 दिसंबर और धम्मा चक्र परिवर्तन 14 अक्टूबर को चैत्य भूमि मुंबई दीक्षाभूमि नागपुर तथा भीम जयंती महू में उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए इकट्ठे होते हैं | यहां हजारों किताबों की दुकान स्थापित हो गई है और किताबें बेची जाती है | अंबेडकर का उनके अनुयायियों को संदेश शिक्षित बनो संगठित रहो संघर्ष करो |