प्राथमिक शिक्षा

अंबेडकर ने सातारा शहर में राजवाड़ा चौक पर स्थित गवर्नमेंट हाई स्कूल मैं 7 नवंबर 1900 को अंग्रेजी की पहली कक्षा में प्रवेश किया इसी दिन से उनके शैक्षणिक जीवन का आरंभ हुआ था इसलिए 7 नवंबर को महाराष्ट्र में विद्यार्थी दिवस रूप में मनाया जाता है | उस समय उन्हें भीवा कर बुलाया जाता था | स्कूल में उस समय दीवार रामजी आंबेडकर यह उनका उपस्थिति पंजिका में क्रमांक 1914 पर अंकित था | जब अंग्रेजी चौथी कक्षा की परीक्षा उत्तीर्ण हुए तब क्योंकि यह अछूतों के असामान्य बात थी इसलिए भीमराव की इस सफलता को जूतों के बीच और सार्वजनिक समारोह में मनाया गया और उनके परिवार के मित्र एवं लेखक दादा केरलस्कर कर द्वारा खुद की लिखी गौतम बुध की पुस्तक उन्हें भेंट दी गई इसे पढ़कर उन्होंने पहली बार गौतमबुद्ध वह बौद्ध धर्म को जाना एवं उनकी शिक्षा से प्रभावित हुई |

माध्यमिक शिक्षा

1904 में अंबेडकर का परिवार मुंबई चला गया जहां उन्होंने एलफिंस्टन रोड पर स्थित गवर्नमेंट हाई स्कूल में आगे की शिक्षा प्राप्त की |

मुंबई विश्वविद्यालय में स्नातक अध्ययन

एक छात्र के रूप में अंबेडकर 1960 में उन्होंने अपनी मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण की और अगले वर्ष उन्होंने एलफिंस्टन कॉलेज में प्रवेश किया जो कि मुंबई विश्वविद्यालय से संबंध था स्तर पर शिक्षा प्राप्त करने वाले अपने समुदाय से भी पहले व्यक्ति थे| 1912 तक उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र और राजनीतिक विज्ञान में कला स्नातक बीए प्राप्त की और बड़ौदा द्वारा राज्य सरकार के साथ काम करने लगे उनकी पत्नी ने अभी अपने नए परिवार को स्थानांतरित कर दिया था और काम शुरू किया जब उन्होंने अपने बीमार पिता को देखने के लिए मुंबई वापस लौटना पड़ा जिनका 2 फरवरी 1913 को निधन हो गया |

कोलंबिया विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर अध्ययन

कोलंबिया विश्वविद्यालय में अंबेडकर 1913 मैं अंबेडकर 22 साल की आयु में संयुक्त राज्य अमेरिका चले गए जहां उन्हें सयाजीराव गायकवाड तृतीय बड़ौदा के गायकवाड द्वारा स्थापित एक योजना के तहत न्यूयॉर्क शहर स्थित कोलंबिया विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर शिक्षा के अवसर प्रदान करने के लिए 3 साल के लिए 11.50 डॉलर प्रति महा बड़ौदा राज्य की छात्रवृत्ति प्रदान की गई थी | वहां पहुंचने के तुरंत बाद वे लिंग विग्सटन हॉल में पारसी मित्र नवल भातेना के साथ बस गए जून 1915 में उन्होंने अपनी कला स्नातकोत्तर m.a. परीक्षा पास की जिसमें अर्थशास्त्र प्रमुख विषय और समाजशास्त्र इतिहास दर्शन शास्त्र और मानव विज्ञानियों ने विषय थे | उन्होंने स्नातकोत्तर के लिए अनशन इंडियंस कॉमर्स विषय पर शोध कार्य प्रस्तुत किया अंबेडकर जॉन डेवी और लोकतंत्र पर उनके काम से प्रभावित थे

1916 में उन्हें अपना दूसरा शोध कार्य नेशनल डिविडेंड ऑफ इंडिया 1916 में अपने तीसरे शोध कार्य इवोल्यूशन ऑफ प्रोविजनल फाइनेंस इन ब्रिटिश इंडिया के लिए अर्थशास्त्र में पीएचडी प्राप्त की | अपने शोध कार्य को प्रकाशित करने के बाद 1927 में अधिकृत रूप से पीएचडी पीएसजी प्रदान की गई 9 मई को उन्होंने मानव विज्ञानी एलेग्जेंडर गोल्डन वेदर द्वारा आयोजित एक सेमिनार में भारत में जानती अरुण की प्रणाली उत्पत्ति और विकास नामक एक शोध पत्र प्रस्तुत किया जो उनका पहला प्रकाशित पत्र था 3 वर्षों तक की अवधि के लिए मिले हुए छात्रवृत्ति का उपयोग उन्होंने केवल 2 वर्षों में अमेरिका में पाठ्यक्रम पूरा करने में किया और 1916 में वे लंदन गए |

लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में स्नातकोत्तर अध्ययन

लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में अपने प्रोसेसर और दोस्तों के साथ अंबेडकर 1916 में लंदन चले गए और वहां उन्होंने ग्रेस इन में बैरिस्टर कोर्स के लिए प्रवेश लिया और साथ ही लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में भी प्रवेश लिया जहां उन्होंने अर्थशास्त्र की डॉक्टरेट 30 इस पर काम करना शुरू किया जून 1917 में विवश होकर उन्होंने अपना अध्ययन अस्थाई तौर पर बीच में ही छोड़कर भारत लौट आए | उनकी बड़ौदा राज्य में उनकी छात्रवृत्ति समाप्त हो गई थी लौटते समय उनके पुस्तक संग्रह हो को इस जहां से अलग जहाज पर भेजा गया था जिसे जर्मन पनडु्बी के तार वीडियो द्वारा डूबो दिया गया यह प्रथम विश्वयुद्ध का कारण था उन्होंने 4 साल के भीतर अपनी थीसिस के लिए लंदन लौटने की अनुमति मिली बड़ौदा राज्य के सेना सचिव के रूप से काम करते हुए अपने जीवन में अचानक फिर से आए भेदभाव से डॉक्टर भीमराव हम अंबेडकर निराश हो गए और अपनी नौकरी छोड़ एक निजी ट्विटर और लिखा कर के रूप में काम करने लगे |

यहां तक कि उन्होंने अपना परामर्श और सभी आरंभ किया जो उनकी सामाजिक स्थिति के कारण विफल रहा अपने एक अंग्रेज जानकर मुंबई के पूर्व राज्यपाल नॉट सी ड नेम के कारण उन्हें मुंबई में स्वीडन एम कॉलेज ऑफ कॉमर्स इकोनॉमिक्स में राजनीतिक अर्थव्यवस्था के प्रोसेसर के रूप में नौकरी मिल गई | 1920 में कोल्हापुर के शाहू महाराज अपने फारसी मित्र के सहयोग और कुछ निजी बचत के सहयोग से वह एक बार फिर इंग्लैंड वापस जाने में सफल हो पाए तथा 1921 में विज्ञान स्नातकोत्तर एमएससी प्राप्त किए जिसके लिए उन्होंने प्रोविजनल डिस्टलाइजेशन ऑफ इंपीरियल फाइनेंस इन ब्रिटिश इंडिया खोज ग्रंथों प्रस्तुत किया था | 1922 में उन्हें ग्रेस इन बैरिस्टर लार्ज डिग्री प्रदान की और उन्हें ब्रिटिश बार में बैरिस्टर के रूप में प्रवेश मिल गया 1923 में उन्होंने अर्थशास्त्र में डीएससी डॉक्टर ऑफ साइंस उपाधि प्राप्त की उनकी फीस इस द प्रॉब्लम ऑफ रूपी इट्स ओरिजन एंड इट्स सॉल्यूशन पर थी | लंदन का अध्ययन पूर्ण कर भारत वापस लौटे हुए भीमराव अंबेडकर 3 महीने जर्मनी में रुके जहां उन्होंने अपना अर्थशास्त्र का अध्ययन विश्वविद्यालय में जारी रखा किंतु समय की कमी से वे विश्वविद्यालय में अधिक नहीं ठहर सके उनकी तीसरी और चौथी डॉक्टर एड्स एलएलडी कोलंबी विश्वविद्यालय 1952 और डिलीट उस्मानिया विश्वविद्यालय 1953 सम्मानित उपाध्याय थी |